शादी की तैयारी शुरू होते ही कई सवाल उठते हैं: सगाई की अंगूठी कितने में लें? मंगलसूत्र कौन देगा? घर का सामान कौन खरीदेगा? गिफ्ट रजिस्ट्री बनाएं या नहीं? हर परिवार की परंपरा अलग होती है, पर एक बात हमेशा काम आती है, पहले से योजना बनाना। भारत में नकद गिफ्ट (लिफाफे में पैसे) अभी भी सबसे आम तरीका है, और सही राशि रिश्ते पर निर्भर करती है।
शादी के गहने

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, परंपरा और निवेश दोनों है। शादी में गहनों का चुनाव परिवार, क्षेत्र और बजट तीनों पर निर्भर करता है।
सोने की कीमत हर दिन बदलती है। शादी से 2-3 महीने पहले भाव देखते रहें और अच्छे भाव पर बुकिंग कर लें। कई ज्वेलरी शॉप्स में "गोल्ड बुकिंग" स्कीम मिलती है जिसमें आज का भाव लॉक हो जाता है।
शादी में कितना गिफ्ट दें?

भारत में नकद गिफ्ट देना सबसे सामान्य है। सही राशि रिश्ते की गहराई पर निर्भर करती है।
राशि में ₹1 जोड़ना शुभ माना जाता है (जैसे ₹501, ₹1,001, ₹5,001)। यह परंपरा यह दर्शाती है कि रिश्ता "पूरा" नहीं बल्कि आगे बढ़ता रहेगा।
शादी के गिफ्ट और गिफ्ट रजिस्ट्री
भारत में नकद गिफ्ट (लिफाफे में पैसे) अभी भी सबसे आम है। शहरों में गिफ्ट रजिस्ट्री का चलन बढ़ रहा है, पर अभी भी ज़्यादातर मेहमान नकद देना पसंद करते हैं।
भारत में गिफ्ट रजिस्ट्री के विकल्प: Amazon India, Flipkart Wishlist, Myntra, या शादी की वेबसाइट पर कस्टम लिस्ट।
शहरी जोड़े अब "हनीमून फंड" या "घर के लिए फंड" भी रजिस्ट्री में जोड़ रहे हैं। मेहमानों को एक निश्चित राशि ऑनलाइन ट्रांसफर करने का विकल्प मिलता है, जो सबके लिए सुविधाजनक होता है।
गृहस्थी की तैयारी: क्या खरीदें, क्या किराए पर लें
घरेलू उपकरण
पहले ज़रूरी, बाकी बाद में। फ्रिज, वॉशिंग मशीन, चूल्हा और बिस्तर पहले लें। सोफा, डाइनिंग टेबल, TV और एसी धीरे-धीरे जोड़ सकते हैं। शादी के सीज़न (नवंबर-फरवरी) में ऑफर ज़्यादा आते हैं।
फर्नीचर
खर्च का बंटवारा: कौन क्या देगा?
दहेज और स्वैच्छिक योगदान में फर्क: दहेज (Dowry) वह है जो दबाव में या मांग पर दिया जाए, जो Dowry Prohibition Act, 1961 के तहत गैरकानूनी है। लड़की के परिवार द्वारा खुशी से और बिना किसी मांग के दिया गया घर का सामान कानूनी है और पारिवारिक उपहार की श्रेणी में आता है। असली सवाल यह है कि क्या यह दबाव के बिना हो रहा है।
दहेज को लेकर परिवारों में अब भी दबाव हो सकता है। लेकिन कानून स्पष्ट है, दहेज लेना-देना दोनों गैरकानूनी है (Dowry Prohibition Act, 1961)। खुलकर बात करें, और "गृहस्थी की ज़रूरतें" के नज़रिए से योजना बनाएं, न कि दबाव में।
हर परंपरा निभाना vs. दोनों परिवारों की सहमति से तय करना
चेकलिस्ट: गहने, गिफ्ट और गृहस्थी की तैयारी
गृहस्थी का खर्च भी बजट में शामिल करें
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शादी से पहले की तैयारी के खर्चे
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